रेस में शामिल थे बड़े-बड़े नाम आज से IPL का आगाज हो रहा है लेकिन इस बार IPL की जो सबसे बड़ी टीम है, जो सबसे फेमस टीम है, जो सबसे महंगी टीम है, वो इस बार। नए ओनर के साथ मैदान पर नजर आएगी।
कौन है जिसने RCB को खरीदा है? कितने में डील हुई है और विराट कोहली की IPL टीम का नया मालिक कौन है?
आपको बताते हैं। इस तरीके से हम बात करें, दो बिलियन डॉलर है RCB की कीमत, जी हां RCB की जो ब्रांड वैल्यू फाइनल हुई है। वो दो बिलियन डॉलर है, मतलब होश उड़ जाएंगे, हवा उड़ जाएगी। इतना पैसा RCB पे लग चुका है इतना बड़ा ब्रांड वैल्यू RCB का बन चुका है। IPL इतिहास की सबसे महंगी टीम है RCB
2 बिलियन डॉलर के साथ, 200 करोड़ डॉलर के साथ जो इनकी वैल्यू लगी है, वो IPL के इतिहास की आज तक की सबसे महंगी टीम है।
सबसे नंबर वन ब्रांड वैल्यू टीम वाली RCB है। सिर्फ एक बार IPL जीता है, लेकिन विराट कोहली और इनके फैंस ने इनको टॉप पर पहुंचाना है 31 मार्च 2026 टीम बिकने की डेडलाइन और यह डेडलाइन फाइनल हुई थी कि 31 मार्च 2026 तक RCB बिक जाएगी, एक नया ओनर RCB को मिल जाएगा अब क्या अपडेट है, किसने खरीदा है, कौन रेस में है, कौन बाहर हो गया, वो जानिए डियाजियो है, RCB की मौजूदा कंपनी पियाजो एक फॉरेन की कंपनी है, जिसका जो मेन काम है। वो लिकर बनाना है, और उन्होंने।
यह इनके ओनर है डीआरजीओ।
RCB को खरीदने के लिए चार टीम ने बोली लगाई और आपको बता दूं कि Royal Challenger बैंगलोर को खरीदने के लिए दो बिलियन डॉलर में अपने पास लाने के लिए दो टीम, चार लोगों ने, चार बड़ी कंपनीज ने बोली लगाई है, 18-19 हजार करोड़ के आसपास इसकी ब्रांड वैल्यू भारतीय रुपए में बनती है।
बोली की रेस से दो टीम हो गई बाहर, हालांकि इस बीच जब इतना पैसा बढ़ गया इतना ब्रांड बढ़ गया, वैल्यूएशन इतना बढ़ गया। तो जो दो टीमें थी, वो रेस से पहले ही बाहर हो गई।
मैनचेस्टर यूनाइटेड और सीरम इंस्टीट्यूट हुए बाहर। मैनचेस्टर यूनाइटेड पूरी दुनिया जानती है और सीरम इंस्टीट्यूट आधार पूनावाला की कंपनी है। उन्होंने भी बहुत इंटरेस्ट दिखाया था।
बहुत ट्वीट किए थे, लेकिन RCB का जो ब्रांड वैल्यू है, बहुत ज्यादा जो बढ़ गया उस वजह से सीरम इंस्टीट्यूट ज्यादा आगे नहीं जा पाई और इस रेस से बाहर हो सिर्फ दो ग्रुप के बीच गोली की लड़ाई दो ग्रुप बचे हैं जिनमें बोली की लड़ाई है, और क्या वजह है जो डी आर जी ओ इसकी ओनर है उसको बेच रहे हैं, वह भी जान लीजिए।
रेस में स्वीडिश प्राइवेट इक्विटी फर्म इक्विटी और कंसोर्टियम दो कंपनीज हैं। जिनके बीच में लड़ाई चल रही है।
डीआरजीओ ने RCB को नॉन कोर एसेट माना है।
जो दिया जी है, मैंने आपको पहले बताया था कि उनका लेकर का काम है और उन्होंने RCB, बिकॉज़ नॉन कोर एसेट माना गया।
यानी कि उनका यह एक प्रॉपर बिजनेस नहीं है।
RCB को उन्होंने खरीदा जरूर, लेकिन जो उनका मेन बिजनेस है वो कुछ और है। तो ऐसे में नॉन कोर एसेट माना और वैसे भी अगर मैं आपको समझाना चाहूं कि अगर आज 18
और सीपी की वैल्यू है, तो मुझे नहीं लगता कि अगले पांच सालों में उससे ऊपर जा पाएगी क्योंकि एक पीक आता है हर चीज का और मुझे लगता है IPL ने RCB ने अपना पीक छू लिया है और अगले दो-तीन चार साल के बाद विराट कोहली RCB का हिस्सा नहीं होंगे। तो आप ये अंदाजा लगा सकते हैं कि राइट टाइम पर डी आर जी ओ बेचना चाह रहा है।
सही पैसे पर बेचना चाह रहा है और भैया 18-19 हजार करोड़ उसको मिल रहे हैं। खर्च उसके 5000 करोड़ नहीं हुए होंगे, तो ऐसे में बहुत बड़ा प्रॉफिट है। 10000 करोड़ भी मान लीजिए खर्च हुए, तो बहुत बड़ा प्रॉफिट है। बुक करना चाहते हैं।शराब के बिजनेस पर फोकस करना चाहती है डीआरजी और जैसे मैंने आपको पहले बताया कि उनका बिजनेस लिकर का है, तो वो अपने लिकर के बिजनेस पर ज्यादा फोकस करना चाहते हैं और क्रिकेट से अपना प्रॉफिट। तो ये reson है, अब दो कंपनीज बची है जो जैसा मैंने आपको बताया और आप ये मान लीजिए कि 31 मार्च तक RCB बिक जाएगी और इस नए सीजन में एक नए मालिक के साथ से भी आपको मैदान पर दम दिखाती हुई। जोर लगाती हुई नजर आएगी।
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